और नन्हे
भालू ने लकड़ी का घर नहीं बनाया !!!
(कल विश्व पर्यावरण दिवस था। डीजल चलित गाड़ियों में सवार होकर एयर कंडीसंड कमरों में बैठकर विगड़ते पर्यावरण पर विशेषज्ञों ने खूब माथापच्ची की।वह सब देख सुन कर मुझे चीनी भाषा में बच्चों की यह कहानी याद आगई।)
चीन
की एक पहाड़ी गुफा में भालू का एक बड़ा परिवार रहता था। परिवार में दादा, दादी, अम्मा,
बाबा के साथ साथ छोटे बच्चे भी रहते थे। इतने सारे प्राणियों के लिए गुफा छोटी
पड़ती थी। इसलिए दादा भालू ने नन्हे पोते भालू को सुझाव दिया कि वह पास के जंगल से
लकड़ी काट कर एक लकड़ी का घर बनाए।
नन्हा
भालू बसन्त ऋतु के आगमन के साथ ही घर बनाने के लिए लकड़ी काटने पास के घने जंगल
में घुसा। जंगल में गजब की हरियाली छाई थी। वहां के सारे पेड़ हरे हरे पत्तों से
अपना श्रंगार किये थे। नन्हे भालू को यह हरियाली इतनी भाई कि इन सजे धजे सुंदर हरे
हरे पेड़ो को को काट कर अपना घर बनाना उसे अच्छा नही लगा। और वह खाली हाथ गुफा लौट
आया। बसन्त के बाद ग्रीष्म ऋतु आई। नन्हा भालू फिर जंगल में पेड़ काटने गया। लेकिन
जंगल के सारे पेड़ रंग बिरंगी फूलों की चादर ओढ़े थे। सारा जंगल उन फूलों की खुशबू
से महक रहा था। नन्हा भालू इस रंग में भंग नही करना चाहता था। रंग बिरंगी फूलों से
लदे पेड़ों को काटना उसको अच्छा नहीं लगा। बसन्त ऋतु की भांति ही इस बार भी वह
खाली हाथ वापस गुफा में आगया। फिर आई हेमन्त ऋतु।नन्हा भालू फिर पेड़ काटने जंगल
गया। इस बार जंगल के सारे पेड़ फलों से लदे थे। नन्हे भालू को लगा कि फलों से लदे
पेड़ो को नहीं काटना चाहिये। एक बार फिर वह अपना सा मुह लेकर अपनी गुफा में खाली
हाथ लौट आया। हेमन्त के बाद शिशिर ऋतु आई।नन्हे भालू को लगा घर बनाने का यह सबसे
उत्तम समय है।वह जंगल की ओर चल पड़ा। इस बार जंगल में किसम किसम की चिड़ियों की चहचआहट
गूज रही थी। हर पेड़ की डाल से उनके घोंसले लटक रहे थे। नन्हा भालू अपने एक घर
के लिए इतनी चिड़ियों को कैसे बेघर कर सकता था। इसलिए बिना पेड़ काटे बह अपनी गुफा
में वापस आगया। इस प्रकार साल दर साल गुजरते गए। नन्हे भालू को कोई भी ऐसा मौसम
नहीं मिला जब किसी को हानि पहुचाए बिना वह पेड़ काटकर अपना घर बना सकता था। इसलिए
वह खुशी खुशी अपनी पत्थर की गुफा में ही अपने बड़े परिवार के साथ रहने लगा। नन्हे
भालू की इस जिओ और जीन दो की नीति का उस जंगल में रह रहे सभी जीव जन्तओँ ने स्वागत
किया । उन्होंने नन्हे भालू का आभार जताने के लिए उसे ताजे फूलों का एक गुलदस्ता
भैंट किया ।
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