स. रा. अमेरिका में राष्ट्रपति के
उम्मीदवार नए रोजगारों का स्रजन, शिक्षा
व्यवस्था व स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार, स्वास्थ्य बीमा की सीमाओं, ओबामा
स्वास्थ्य बीमा की कमियों, करों में कटौती, विदेशी पुंजी की अमेरिका में आवक में
बृद्धि के उपायों, जैसे मुद्दों में सार्वजनिक बहस करते हैं। ओबामा बार बार अपनी
दादी जैसी गरीब अमेरिकियों का जिक्र कर आम अमेरिकी की समस्याओं को दूर करने की
अपनी प्रार्थमिकता दोहरा रहे थे। इसके उलट हमारे यहां कांग्रेस अध्यक्षा उत्तर
प्रदेश के मुख्य मंत्री को फोन कर अपने व अपने लाड़ले के संसदीय क्षेत्र में 24
घंटे बिजली की व्यवस्था करवाती हैं। जबकि खास लोगों के संसदीय क्षेत्रों को छोड़
कर पूरे प्रदेश में बिजली के लिए त्राहि त्राहि मची है। सस्ते गैस के सिलेंडरों की
संख्या 6 करने के बाद कांग्रेस शासित प्रदेश सरकारों को तीन और सिलेंडर सस्ते
दामों में बेचने का आदेश देती है। उनको दो संसदीय क्षेत्रों को छोड़कर बाकी उत्तर
प्रदेश की जनता की बिजली की आवश्यकता,तथा गैर कांग्रेस शासित प्रदेशों के लोगों के
लिए सस्ते गैस सिलेंडर की व्यवस्था करना अपनी जिम्मेदारी नही लगती।
हमारे प्रधान
मंत्री का तो कहना ही क्या। वे तो चुनाव लड़ते ही नहीं । इसलिए आम आदमी कि चिंता
भी क्यों करें।उनकी चिंता ही स. रा. अमेरिका की सरकार, वहां की बहुराष्ट्रीय
निगमों की सुविधानुसार देश में बिजली सड़क पानी की व्यवस्था, विशाल भारतीय बाजार की उनके लिए सहज उपलब्धि, विदेशी
पूंजी के लिए बाजार की व्यवस्था, जी डी पी
आदि आदि रहे हैं।इसीलिए चौतरफा विरोध के बावजूद सुर्ख लाल चेहरा लिए बिना एक बार
भी पलक झपकाए,पथरीली आखें देशवासियों पर तरेरते प्रधान मंत्री देश के नाम संदेश
में लोगों को यह समझा रहे थे कि आज की माली हालत में खुदरा क्षेत्र में विदेशी
पूंजी निवेश के बिना अर्थव्यवस्था पटरी पर नहीं आसकती। लेकिन अर्थव्यवस्था पटरी से
उतारने का श्रेय लेने की जुर्रत उन्होंने नहीं की।यह बताना भी ठीक नही समझा कि
कैसे खुदरा क्षेत्र में विदेशी पूंजी निवेश
से भारतीय बच्चों में बढ़ता कुपोषण,बिगड़ती हुई सार्वजनिक स्वास्थ्य
ब्यवस्था, बढ़ती हुई किसानों की आत्महत्याएं,अमीरी तथा गरीबी के बीच चौड़ी होती
खाई,बिगड़ता पर्यावरण जैसी तमाम समस्याएं कैसे दूर होंगी। विपक्ष के लिए भी आम जन
के सवाल बहस के मुद्दे नहीं हैं। वह खुदरा क्षेत्र में विदेशी पूंजी निवेश का
विरोध कर अगले चुनाव की तैयारी करना चाहता है। इसीलिए विकास का तमगा लगाए गुजरात के मुख्य मंत्री ने
अपने चुनाव भाषणों में यह स्पष्ट करने के बजाय कि तथाकथित विकास करने में अग्रणी
होने के बावजूद उनका प्रदेश मानव विकास मानकों जैसे बाल कुपोषण में क्यों आगे है
सोनिया गांधी के विदेश में हुए इलाज में हुए सरकारी धन को मुद्दा बनाया। आम आदमी मूलभूत
आवश्यकताएं भारत के किसी भी राजनीतिक दल की
चिंता नहीं है। ऐसा लगता है कि अमेरिका का राष्ट्रपति अपने देशवासियों के लिए
जवाबदेह होता है जबकि हमारे नेता विदेशी पूंजी के लिए जवाबदेह होते हैं। उसको देश
में खपाने के लिए एड़ी चोटी का दाव लगा देते हैं। सत्ता पाने के बाद क्या मंत्री
क्या सांसद विधायक सरकारी खर्चे पर विदेश यात्राओं की जुगत भिड़ाने में लगे रहते हैं। अभी कुछ समय पहले कर्नाटक के
विधायकों का अध्ययन के बहाने लम्बे विदेशी यात्राओ सपरिवार करने का मामला एक चैनल ने उठाया था। उसके बाद
क्या हुआ पता नही चला।
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