शुक्रवार, 3 जनवरी 2014

अरविंद जी आपने निराश किया!!!


अरविंद जी आपने निराश किया!!!
अरविंद जी जिस तरह से कांग्रेस को बिना शर्त समर्थन देने को मजबूर कर आपने विधान सभा में बहुमत हासिल किया उससे लगा कि आप में अदभुत राजनीतिक इच्छा शक्ति है। हालांकि मेरी एक सहेली मेरी राय से असहमत थी। लेकिन ये क्या! सरकारी मकान व गाड़ी के मामले में तो आपने और आपकी सरकारी पल्टी मार दी।आपकी एक मंत्री ने कहा कि जब सरकारी काम कर रहे हैं तो सरकारी गाड़ी तो लेंगे ही। साथ ही खबरनबीसों से सवाल किया कि वे भी तो अपने दफ्तर की गाड़ी पर ही तो जाते हैं। लेकिन खबरनबीस तो नौकरी करते हैं आप तो सेवा करने आए थे। मैं मानती हूं कि तीन पहिया में बैठकर वह अपने काम को मितव्ययता तथा कार्यकुशलता से नहीं कर सकती। या छोटे छोटे घरों में रह कर सरकारी काम करना जो कई मामलों में चौबीस घंटों का है संभव नहीं है।क्यों कि सरकारी दफ्तर के लिए भी जगह चाहिये। नौकरशाही को पूरी सुविधाओं से लैस दफ्तर चाहिये। आज के तकनीकी युग में बिना 24 घंटे बिजली के दफ्तर चल भी नहीं सकते।साथ ही राजनीतिक भीड़ भाड़, शोर शराबा अड़ोसी पड़ोसी के लिये भी असुविधा का सबब होता है।
      आपके मीडिया को दिये गए जवाब ने भी निराश किया। पूर्व मुख्य मंत्री की दागी कमीज (यहां पर मकान की तुलना प्लैट से कर) से अपनी कमीज सफेद बताकर आप कुछ भी सिद्ध नहीं कर सकते। या मेरा अपना फ्लैट चार कमरों का है यहां एक ही कमरा अधिक है।अंय पांच कमरे तो दफ्तर के हैं। यह कोई तर्क नहीं है। ऐसे ही गोलमोल तर्क और दल भी देते रहे हैं। केजरीवाल जी सादगी सादगी होती है। अपने पूर्ववर्ती से  तुलना कर अपनी पसंद ठीक ठहराने के बजाय यदि आप मीडिया को बताते कि आपको अपने कर्तब्यों को सुचारु रूप से चलाने के लिए जितनी कम से कम सुविधाओं की आवश्यकता आपको आपके मातहत बता रहे हैं उतनी ही सुविधाएं आप तथा आपकी सरकार के मंत्री ले रहे हैं। सादगी के अपने मापदंड होते हैं।उनको दूसरों की उपभोक्तावादी संस्कृति के उजाले में नहीं तोला जासकता। खासकर सादगी को जब जन सेवा के माध्यम के तौर पर पेश किया जारहा हो। अंयथा यह हरेक का व्यक्तिगत मामला है वह कैसी दिनचर्या अपनाए।
महात्मा गांधी भी जब दक्षिण अफ्रिका गए थे तो पूरे साहब बन कर गए थे।लेकिन जब उन्होंने वह चोला उतारा तो सादगी के नए मापदंड स्थापित कर दिये।क्या सादगी ने उनकी कार्यकुशलता कम करदी। आप पार्टी ने हर मसले पर विशेषज्ञ समिति बनाई है। क्या कोई समिति - किस प्रकार शासन प्रशासन में सादगी लाई जासकती है- है। यदि नहीं तो क्या आप ऐसी समिति बनाएंगे।

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