समाचार है कि 16वे लोकसभा
चुनावों में मिली पराजय के बाद कांग्रेस पार्टी के भीतर प्रियंका गांधी को राजनीति
में आगे लाने की मांग जोर पकड़ती जा रही है। इन नेताओं का मानना है कि वह एक बिग
फाइटर हैं और जनता से जुड़ने की उनमें स्वभाविक क्षमता है। उनमें लोगों को आकर्षित
करने की क्षमता है। उल्लेखनीय है कि जब जब कांग्रेसियों को चुनाव में हार की आशंका
होती है यह मांग गाहे बगाहे उठती रहती है।आलोचक इसे कांग्रेस की चापलूसी की
संस्कृति सं जोड़ते हैं। मुझे लगता है कि यह चापलूसी नही कांग्रेसजनों का परजीवीपल
है। प्रियंका को लोगों से जुड़ने तथा लुभाने के जो गुण कांग्रेसी बता रहे हैं बह
गुण अंय कांग्रेसी भी अपने अंदर मेहनत करके विकसित कर सकते हैं। पर मेहनत करनी
पड़ेगी। जिससे कांग्रेसी जी चुरा रहे हैं। बजाय मेहनत करने वे लोग आसान रास्ता
अपनाना चाह रहे है। इससे न कांग्रेस का भला होने वाला है न ही नेहरू गांधी परिवार
का। वर्तमान चुनाव में जब नरेंद्र मोदी ने मां बेटे को, पूरे नेहरू गांधी परिवार
को पानी पी पी कर कोसा एतिहासिक तथ्यों को तोड़ा मरोड़ा तब भी ये परजीवी चुपचाप
बैठे रहे किसी ने सही तथ्यों के सहारे मोदी के इल्जामों को काटने की जहमत नहीं
उठाई।
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