गुरुवार, 24 जून 2010

परिवार की झूठी आन बान के लिए
राखी व भाई दूज धूमधाम से मनाने वाले इस देश में धर्म और संस्कृति बचाने के नाम पर बहनों तथा बेटियों की हत्या परिवार, समाज,व पंचायत की सहमति या आह्वान पर हो रही है। समाज के स्वंयभू ठेकेदार इन हत्याओं को ताल ठोक कर सही ठहरा रहै हैं। पर जेल जाने तथा अपने कर्मों की सजा भुगतने तैयार नही हैं।इसीलिए आपनी राजनीतिक ताकत का दुरुपयोग कर कानून बदलवाने का कोशिश कर रहे हैं। लेकिन आम भारतीय स्त्री पुरुष अपने निजी संबंधों खास कर यौन संबंधों में इस प्रकार की जड़ता स्वीकार नही करते। इसके तीन उदाहरण पिछले एक सप्ताह में देखने को मिले।
उदाहरण एक--
क कुछ साल पहले मुझे घर के काम काज में मदद करती थी। उसकी तीन बेटियां थी। वह बहुत दुखी रहती थी। कारण उसका पति अपनी सारी कमाई नशे पते में बरबाद कर देता था।अभी उसकी एक सहेली ने बताया कि क ने अपना नशेड़ी पति छोड़ दिया है। अपने तीनों बेटियों के साथ वह किसी अंय पुरुष के साथ रहने लग गई। उसका अब एक बेटा भी है।ब्राह्मणी पितृसत्ता के झंडाबरदारों को नारी की यह स्वायत्ता रास नहीं आएगी। अतः वे इसे अधार्मिक अनैतिक अभारतीय कहेंगे।परंतु यह स्वतंत्रता आम भारतीय स्त्री पुरुष ( जो अंग्रेजी से बिलकुल भी वाकिफ नहीं हैं)युगों से भोग रहे हैं। केवल ब्राह्मणी पितृसत्ता स्वायत यौन संबंधों पर नियंत्रण लगाती है। आम भारतीय हमेशा से ही इस पितृसत्ता के दायरे से बाहर रहा है।आज हर भारतीय को इस पितृसत्ता के दायरे में जबरदस्ती लाने की धर्म के ठेकेदारों की कोशिश का पुरजोर विरोध करना आवश्यक है।
उदाहरण दो
ख का पति ख को मारने के बाद उसको मरा जान कर भाग गया। अभी तक वापस नहीं आया। उसके पड़ोसी और दोस्त ने डाक्टर के पास समय पर ले जाकर उसकी जान बचाई। पूरा इलाज कराया। आज वे दोनों साथ साथ रह रहे हैं। उनके बच्चे भी हैं।
उदाहरण तीन
ग विधवा है उसके दो बेटे हैं जो अपनी दादी के के पास हैं। वह अपने दोस्त के साथ शहर आगई है फिर से जिंदगी बसाने। संघर्ष हैं पर जीने की तमन्ना भी है जो रो रो कर किस्मत को कोसने से हजार गुना अच्छा है।
असल में ब्राह्मणी पितृसत्ता को भारतीय पितृसत्ता बताना अंग्रेजों ने प्रारंभ किया। हिंदू धर्मावलंबियों के सामाजिक, धार्मिक व नैतिक नियमों कानूनों में एक रूपता लाने के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी ने बनारस के पंडितों की एक समिति बनाई। इस समिति ने हिंदू धर्म ग्रंथों का अध्ययन कर जो नियम सुझाए उनको हिंदू धर्मावलंबियों के सामाजिक, धार्मिक व नैतिक नियमों के तौर पर मान्यता दे दी गई। यहां यह बताना आवश्यक है कि तब हिंदू धर्म शास्त्रों की वर्जनाएं ब्राह्मणों पर ही लागू होती थी। अंग्रेजी कानून व न्याय व्यवस्था ने इसे सारे हिंदू समाज पर थोप दिया।आज धर्म के ठेकेदार इसे भारतीय के नाम पर सबके ऊपर थोपने पर आमदा हैं।

परिवार की इज्जत की खातिर -1

उदाहरण एक--
क कुछ साल पहले मुझे घर के काम काज में मदद करती थी। उसकी तीन बेटियां थी। वह बहुत दुखी रहती थी। कारण उसका पति अपनी सारी कमाई नशे पते में बरबाद कर देता था।अभी उसकी एक सहेली ने बताया कि क ने अपना नशेड़ी पति छोड़ दिया है। अपने तीनों बेटियों के साथ वह किसी अंय पुरुष के साथ रहने लग गई। उसका अब एक बेटा भी है।ब्राह्मणी पितृसत्ता के झंडाबरदारों को नारी की यह स्वायत्ता रास नहीं आएगी। अतः वे इसे अधार्मिक अनैतिक अभारतीय कहेंगे।परंतु यह स्वतंत्रता आम भारतीय स्त्री पुरुष ( जो अंग्रेजी से बिलकुल भी वाकिफ नहीं हैं)युगों से भोग रहे हैं। केवल ब्राह्मणी पितृसत्ता स्वायत यौन संबंधों पर नियंत्रण लगाती है। आम भारतीय हमेशा से ही इस पितृसत्ता के दायरे से बाहर रहा है।आज हर भारतीय को इस पितृसत्ता के दायरे में जबरदस्ती लाने की धर्म के ठेकेदारों की कोशिश का पुरजोर विरोध करना आवश्यक है।

परिवार की इज्जत की खातिर

परिवार की झूठी आन बान के लिए राखी व भाई दूज धूमधाम से मनाने वाले इस देश में धर्म और संस्कृति बचाने के नाम पर बहनों तथा बेटियों की हत्या परिवार, समाज,व पंचायत की सहमति या आह्वान पर हो रही है। समाज के स्वंयभू ठेकेदार इन हत्याओं को ताल ठोक कर सही ठहरा रहै हैं। पर जेल जाने तथा अपने कर्मों की सजा भुगतने तैयार नही हैं।इसीलिए आपनी राजनीतिक ताकत का दुरुपयोग कर कानून बदलवाने का कोशिश कर रहे हैं। लेकिन आम भारतीय स्त्री पुरुष अपने निजी संबंधों खास कर यौन संबंधों में इस प्रकार की जड़ता स्वीकार नही करते। इसके तीन उदाहरण पिछले एक सप्ताह में देखने को मिले।

बुधवार, 23 जून 2010

भोपाल गैस पीड़ितों को न्याय

मंत्री समूह ने आखिरकार अपनी रपट प्रधान मंत्री को दे दी और उमीद के अनुरूप ही अपने सुझाव दिये। मंत्री समूह को दाव जोंस के विरुद्ध जाने की हिम्मत ही नहीं थी। अतः 25 साल बाद भोपाल का जहरीला कचरा अपने खर्चे पर निपटाने का सुझाव दे डाला। ओबामा जैसी शिद्दत से मुआवजा वसूलने का माद्दा इन मंत्रियों के पास होता तो क्या आज हमारे देश की यह हालत होता।