गुरुवार, 24 जून 2010

परिवार की इज्जत की खातिर

परिवार की झूठी आन बान के लिए राखी व भाई दूज धूमधाम से मनाने वाले इस देश में धर्म और संस्कृति बचाने के नाम पर बहनों तथा बेटियों की हत्या परिवार, समाज,व पंचायत की सहमति या आह्वान पर हो रही है। समाज के स्वंयभू ठेकेदार इन हत्याओं को ताल ठोक कर सही ठहरा रहै हैं। पर जेल जाने तथा अपने कर्मों की सजा भुगतने तैयार नही हैं।इसीलिए आपनी राजनीतिक ताकत का दुरुपयोग कर कानून बदलवाने का कोशिश कर रहे हैं। लेकिन आम भारतीय स्त्री पुरुष अपने निजी संबंधों खास कर यौन संबंधों में इस प्रकार की जड़ता स्वीकार नही करते। इसके तीन उदाहरण पिछले एक सप्ताह में देखने को मिले।

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