21,9,2013को टी वी चैनलों
में पट्टी चल रही थी कि यह 125 करोड़ भारतीयों का अपमान है। इस अपमान का कारण
स्वामी रामदेव के अनुसार उनको इग्लेंड में कस्टम्स ने उनको रोका पूछताछ की दूसरे
दिन फिर जांच के लिए हाजिर होने का वादा लेकर जाने दिया। एक टी वी चैनल में रामदेव
जी का प्रवचन चल रहा था जिसमें नाम लिए
बगैर वह सोनिया गांधी को पानी पी पी कर कोस रहे थे और इस घटना के लिए सोनिया को
दोष दे रहे थे।उनके श्रोता पढ़े लिखे तो होंगे ही साथ में लम्बे समय से इंग्लेंड
में रह रहे होंगे। पर वे रामदेव जी के
आरोपों पर तालियां बजा कर समर्थन कर रहे थे। किसी ने भी स्वामी जी से यह नहीं कहा
कि यहां पर कानून का राज है बिना कारण किसी को रोका नहीं जाता है। बाद में एक चैनल
में दिखाया गया कि सारी गलतफहमी वीजा को
लेकर थी। असल में वीजा टूरिस्ट था जब कि स्वामी जी वहां योग सिखाने (जिसके लिए अछी
खासी राशि ली जाती है।)अतः उन्हें व्यवसायिक वीजा दिया जाना चाहिये था।रैडिफ.काम
ने भी विश्वस्त सूत्रों के हवाले बताया वीजा की विसंगतियों की वजह से ही रोका
गया।राम देव बार बार कह रहे हैं कि सरकारी तंत्र ने कोई मदद नही की। जबकि इंडिया
टुडे का दावा है कि भारतीय उच्चायोग के अधिकारी रामदेव के बरी होने तक हवाई अड्डे
पर ही थे उन्ही के हस्तक्षेप से रिहाई हुई।सवाल है कि खुद को साधु कहने वाले
स्वामी विदेशी जमी पर घटी इस घटना पर इतना झूठ बोलकर किन भारतीयों का मान बढ़ा रहे
थे। पहले तो टूरिस्ट वीजा के लिए अर्जी लगाना ही गलत था।फिर सरेआम सारी घटना का
गलत दोष दूसरे पर मढ़कर देश का कौन सा गौरव बढ़ा दिया। साधु संत तो अपनी गलती
मानने से गुरेज नही करते।
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