मंगलवार, 8 अप्रैल 2014

ईमानदारी की कीमत दी जाती है उसके लिए सजा नही भुगती जाती


1970 के दशक में जब लोक नायक जय प्रकाश नारायण भ्रष्टाचार के विरुद्ध अलख जलाए हुए थे तो खीजकर तत्कालीन प्रधानमंत्री ने अपने बचाव में कहा था यह तो विश्व के सभी देशों में है। लेकिन उदारीकरण के बाद जिस प्रकार मध्य वर्ग में उपभोक्तावाद के साथ साथ भ्रष्टाचार भी दिन दूनी रात चौगुनी रफ्तार से बढ़ा उससे आम आदमी त्रस्त होगया। यही अन्ना आंदोलन की सफलता की कुंजी थी।पर आज 16वीं लोक सभा के चुनाव प्रचार में क्या होरहा है। जो लाग आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे थे, जिन्होंने कुछ सीटें जीतने की खातिर भ्रष्ट उमीदवारों को सिर आखों पर बिठाया है वे तो जनता की (चाहे पैसे देकर या झूठे वादे कर बरगलाकर लाई गई हो)वाही वाही लूट रहे हैं। पर जो ईमानदारी की राजनीति करने की कोशिश कर रहे हैं उन पर थप्पड़ बरसाए जारहे हैं। या स्याही व अंडे फैके जारहे हैं। जो लोग ऐसा कर रहे हैं वे हमारे समाज के चरित्र पर कालिख पोत रहे हैं। क्या हम इतने गए गुजरे होगए हैं कि ईमानदार लोगों को सहन करने का साहस भी हममें नहीं रह गया है। भ्रष्टाचारी जेल से छूट कर आते हैं तो उनको उनके तथाकथित समर्थकों द्वारा इस प्रकार सिर आखों पर बैठाया जाता है मानो कोई बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल की हो। अरविंद केजरीवाल या आम आदमी पार्टी पर अभी तक भ्रष्टाचार का कोई आरोप ठोस सबूतों के साथ नहीं लगा है। ऐसे में उन के साथ इस प्रकार का भद्दा व्यवहार भ्रष्टाचारियों की हताशा ही दर्शाता है। साथ ही हमारे समाज के चरित्र पर भी सवाल उठाता है। ये थप्पड़ या यह कालिख किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं वरन उन सबके लिए है जो ईमानदारी की कद्र करते हैं। इसलिये इसकी कड़े शब्दों में भर्तसना की जानी चाहिये। इसके विरुद्ध वातावरण बनाना आवश्यक है।      

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