गुरुवार, 5 दिसंबर 2013

मांओं तथा बहिनों का कवच




नारी के रूप अनेक और हर रूप में वह पुरुष की ही सेवा सुश्रुषा करती है। नरेंद्र मोदी कोई अपवाद नहीं है।अभी पांच राज्यों में चुनावों के दौरान जब सुरक्षा के नाम पर एक महिला की जासूसी करवाने का आरोप मोदी पर लगा तो मोदी ने अपने एक भाषण में खुद पर खतरा बताया साथ ही मांओं तथा बहिनों के कवच के संरक्षण में खुद को सुरक्षित बताया। इससे पहले जब गुजराती महिलाओं और लड़कियों के कुपोषण का मुद्दा उछला तो मोदी साहब ने फरमाया कि पतला दिखने के चक्कर में महिलाएं और लड़कियां दूध नही पीती। में इसी दौरान एक टी वी चैनल पर मल्लिका सारभाई ने बताया कि मोदी ने गुजरात की महिलाओं को आश्वासन दिया था कि उनको अपनी सुरक्षा कि चिंता करने की जरुरत नहीं है कारण उनका भाई पूरी रात जागकर उनकी रक्षा करता है। लेकिन जब 600 किसानियों जिनके पतियों ने आत्महत्या करली थी मोदी से मदद की गुहार की तो मोदी ने कोई जवाब नहीं दिया। यही व्यवहार उन 150 महिलाओँ के साथ किया गया था जिनके पति जहरीली शराब पी कर मर गये थे। ऐसा लगता है मोदी माओं बहिनों से केवल लेना जानते हैं देना  नहीं। राष्ट्रीय स्तर पर भी सुषमा स्वराज सीनियरिटी के हिसाब से प्रधान मंत्री पद की सबसे मजबूत दावेदार थी। पर मोदी उनको धकिया कर खुद को आगे बढ़ा दिया। उन्होंने नही कहा कि अपनी बहिन को जिताने के लिए काम करेंगे अपने लिए नहीं। यहां तक तो फिर भी ठीक ही था। आखिर राजनीति में यह तो चलता ही है।
      लेकिन हद तो तब होगई जब मोदी ने जम्मू में अपने समर्थन में हवा बनाने के लिए काश्मीरी महिलाओं के समान अधिकारों को सवाल उठा दिया और उदाहरण काश्मीर के मुख्य मंत्री की बहिन का दिया गया। अधिकार तो गुजराती महिलाओं के खास कर उनकी स्वयं की पत्नी के भी हैं।क्या जशोदाबेन चिमनलाल मोदी(देखियेhttp://www.openthemagazine.com/article/nation/i-am-narendra-modi-s-wife) के कोई अधिकार नहीं है।  वह भी किसी की बेटी है। शादी के बाद उसके भी तो अधिकार बनते हैं। और यदि वह स्वंय ऐसे अत्याचार करते हैं तो औरों को किस मुह से रोकेंगे। 

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